बालगीत
हम भारत के भरत खेलते, सिंहों की संतान से । कोई देश नहीं दुनिया में बढ़कर हिन्दुस्थान से ।। ध्रु ।।
इस मिट्टी में पैदा होना, बड़े गर्व की बात है । साहस और वीरता अपनी, पुरखों की सौगात है । बड़ी बड़ी ज्वालाओं से कम, नहीं यहाँ चिंगारियाँ । काँटे पहले फूल बाद में देती हैं फुलवारियाँ । कभी महकते कभी चहकते, जीते मरते शान से । कोई देश नहीं दुनिया में, बढ़कर हिन्दुस्थान से ।।। 11
कूद समर में आगे आये जब भी हमें ललकारने । अंगुली दांतों तले दबाये अचरज से संसार ने । बनते आये हैं हम पन्ने गौरव के इतिहास में । जब भी निकला हीरा निकला यहाँ किसी भी खान से । कोई देश नहीं दुनिया में बढ़कर हिन्दुस्थान से ।।2।।
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