गीत
करवट बदल रहा है देखो, भारत का इतिहास । जाग उठा है हिन्दू-हृदय में, विश्व-विजय विश्वास ।। ध्रु ।।
सदियों से विस्मृत गौरव का, भारत माँ परिचय देगी । सौम्य शान्त सुखदायी जननी, नव-युग नवजीवन देगी । उस जीवन-दर्शन से होगा, मानव धर्म विकास । पश्चिम के असफल चिन्तन का निश्चित होगा ह्रास ।।1।।
यवन मिटे यूनान मिट गये, भरत भूमि है अविनाशी । आदि-अनादि अनंत राष्ट्र हैं, संस्कृति शुचिता अभिलाषी । भोग-वाद के महल ढह रहे, बदल रहा इतिहास । बुझा सके हिन्दुत्व सुधा ही, अब वसुधा की प्यास 11211
बारम्बार क्षमा अरिदल को, ऐसी भूल न अब होगी । कोटि-कोटि बाँहों वाली माँ, ना अबला कहलायेगी । देश-विघातक षड्यंत्रों का, निश्चित निकट-विनाश । एक अखंडित-भारत देगा, अनुपम विमल-प्रकाश ।।३।।
संघ-वृक्ष शाखा-उपशाखा, दसों दिशा में फैल रही । हिन्दू-राष्ट्र की विजय पताका, लहर-लहर ललकार रही । केवल सत्ता से मत करना, परिवर्तन की आस । जागृत जनता के केन्द्रों से, होगा अमर समाज ।।4।।
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