संघ के गीत
(सम्पूर्ण गीत संग्रह)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख गीत, गणगीत, एकलगीत एवं बालगीतों का सुव्यवस्थित संग्रह। यहाँ प्रत्येक गीत का सम्पूर्ण पाठ, सरल हिन्दी अर्थ, भावार्थ, प्रमुख शिक्षाएँ तथा प्रेरणादायक संदेश एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया गया है।
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संघ के गीत क्या हैं?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गीत केवल संगीत रचनाएँ नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, चरित्र निर्माण, सेवा, समरसता, संगठन, त्याग, अनुशासन एवं भारतीय संस्कृति के जीवन मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने का प्रभावी माध्यम हैं। शाखा, प्रशिक्षण वर्ग, शिविर, उत्सव एवं विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इन गीतों का सामूहिक गायन स्वयंसेवकों में उत्साह, आत्मविश्वास, राष्ट्रीय चेतना और संगठन भावना का विकास करता है।
इस पृष्ठ पर संघ के प्रमुख गीत, प्रेरणादायक बालगीत, गणगीत एवं अन्य महत्वपूर्ण रचनाओं का सुव्यवस्थित संग्रह प्रस्तुत किया गया है। प्रत्येक गीत के लिए अलग विस्तृत पृष्ठ उपलब्ध है, जहाँ आप गीत का सम्पूर्ण पाठ, हिन्दी अर्थ, भावार्थ, प्रमुख संदेश तथा उससे मिलने वाली जीवन शिक्षाओं को सरल भाषा में पढ़ सकते हैं।
📚 इस संग्रह में आपको क्या मिलेगा?
"संघ के गीत केवल स्वर नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, संगठन, सेवा, संस्कार और समर्पण की जीवंत प्रेरणा हैं।"
संघ के प्रमुख गीत एवं बालगीत
नीचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख गीतों एवं बालगीतों का सुव्यवस्थित संग्रह दिया गया है। किसी भी गीत पर क्लिक करके उसका सम्पूर्ण पाठ, हिन्दी अर्थ, भावार्थ एवं विस्तृत व्याख्या पढ़ सकते हैं।
🚩 प्रमुख संघ गीत
हम सभी का जन्म तव प्रतिविम्ब सा बन जाय
संघ स्थापना, साधना एवं राष्ट्र समर्पण पर आधारित प्रेरणादायक गीत।
प्राची के मुख की अरुण ज्योति
भगवा ध्वज की महिमा, त्याग, वीरता और भारतीय संस्कृति का प्रेरक गीत।
संगठन गढ़े चलो
एकता, संगठन, राष्ट्रसेवा और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला गीत।
जाग उठे हम हिन्दू फिर से
राष्ट्र गौरव, शौर्य और सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने वाला गीत।
करवट बदल रहा है देखो भारत का इतिहास
भारत के पुनर्जागरण और उज्ज्वल भविष्य का प्रेरणादायक राष्ट्रगीत।
हम करें राष्ट्र आराधन
तन, मन और धन से राष्ट्र सेवा एवं राष्ट्र आराधना का प्रेरक गीत।
🎈 प्रमुख बालगीत
नदिया न पिए कभी अपना जल
निःस्वार्थ सेवा, परोपकार और सच्चे इंसान के गुणों पर आधारित बालगीत।
शाखा है गंगा की धारा
शाखा जीवन, संस्कार और संगठन भावना को प्रेरित करने वाला बालगीत।
हम भारत के भरत खेलते
वीरता, आत्मगौरव और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत प्रेरणादायक बालगीत।
चंदन है इस देश की माटी
भारत की संस्कृति, तपोभूमि और आध्यात्मिक विरासत का सुंदर वर्णन।
हमको अपने भारत की माटी से अनुपम प्यार है
भारत माता और मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम का प्रेरक बालगीत।
उठो जवानों देश की वसुन्धरा पुकारती है
युवाओं में राष्ट्रभक्ति, साहस और कर्तव्यबोध जगाने वाला ओजस्वी बालगीत।
गीत -1
हम सभी का जन्म तव प्रतिविम्ब सा बन जाय, और’ अधूरी साधना चिर पूर्ण बस हो जाय ।।
बाल्य जीवन से लगाकर अन्त तक की दिव्य झाँकी, मूक आजीवन तपस्या जा सके किस भाँति आँकी,
क्षीर सिंधु अथाह, विधि से भी न नापा जाय, चाह है उस सिंधु की हम बूँद ही बन जाय ।। 1।।
थे अकेले आप लेकिन बीज का था भाव पाया। बो दिया निज को अमरवट संघ भारत में उगाया ।
राष्ट्र ही क्या अखिल जग का आसरा हो जाय, और उसकी हम टहनियाँ-पत्तियाँ बन जाएँ ।। 2।।
आप के दिल की कसक हो वेदना जागृत हमारी, ‘याचि देही, याचि डोला’ मंत्र रटते हैं पुजारी । बढ़ रहे हम आप का आशीष स्वर्गिक पाय, जो सिखाया आपने प्रत्यक्ष हम कर पाएँ साधना की पूर्ति फिर लवमात्र में हो जाय ।। 3 ।।
गीत 2
प्राची के मुख की अरुण ज्योति, यह भगवा ध्वज फहरे यह भगवा ध्वज फहरे ।
यह वह्नि शिखा का वेष लिए, गत वैभव का संदेश लिए हिन्दू संस्कृति का अचल रूप, यह भगवा ध्वज फहरे ।। 1 । ।
भारतमाता का उच्च भाल, आर्यों के उर की अग्नि ज्वाल ।
हिन्दू संस्कृति का अमर चिह्न, यह भगवा ध्वज फहरे । 12 ।।
यह चन्द्रगुप्त कर की कृपाण, विक्रमादित्य का शिरस्त्राण ।
इस आर्य देश का कठिन कवच, यह भगवा ध्वज फहरे ।।3।।
बप्पा रावल की शान यही, चौहान नृपति का मान यही राणा के त्यागों का प्रतीक, यह भगवा ध्वज फहरे ||4||
बंदा गुरु के बलिदानों से, रक्षित फत्ता के प्राणों से । नीतिज्ञ शिवा का विजयकेतु, यह भगवा ध्वज फहरे ।।5।।
गीत 3
संगठन गढ़े चलो सुपंथ पर बढ़े चलो । भला हो जिसमें देश का वो काम सब किए चलो ।।
युग के साथ मिल के सब कदम बढ़ाना सीख लो, एकता के स्वर में गीत गुनगुनाना सीख लो,
भूल कर भी मुख से जाति पंथ की न बात हो, भाषा प्रान्त के लिए कभी न रक्तपात हो,
फूट का भरा घड़ा है फोड़ कर बढ़े चलो भला हो जिसमें देश का आ रही है आज चारों ओर से यही पुकार,
हम करेंगे त्याग मातृभूमि के लिए अपार, कष्ट जो मिलेंगे मुस्कुराते सब सहेंगे हम,
देश के लिए सदा जियेंगे और मरेंगे हम, देश का ही भाग्य अपना भाग्य है ये सोच लो भला हो जिसमें देश का 112 11
गीत 4
जाग उठे हम हिन्दू फिर से, विजय ध्वजा फहराने अंगड़ाई ले चले पुत्र हैं, माँ के कष्ट मिटाने ।।।
जिनके पुरखे महा यशस्वी, वे फिर क्यों घबराएँ जिनके सुत अतुलित बलशाली, शौर्य गगन पर छाएँ। लेकर शस्त्र-शास्त्र को कर में, शत्रु-हृदय दहलाने ।।1।
हम अगस्त्य बन महासिंधु को, अंजुलि में पी जाएँ तीन डगों में सृष्टि नाप लें, कालकूट पी जाएँ पृथ्वी के हम अमर पुत्र हैं, जग को चले जगाने ।। 2 ।
हिन्दू भाव को जब-जब भूले आई विपद् महान् भाई टूटे धरती खोई, मिटे धर्म-संस्थान भूलें छोड़ें और गुँजा दें, जय से भरे तराने । । 3 ।
गीत 5
करवट बदल रहा है देखो, भारत का इतिहास, जाग उठा है हिन्दु-हृदय में विश्व-विजय विश्वास ।।ध्रु।।
सदियों से विस्मृत गौरव का, भारत माँ परिचय देगी। सौम्य शान्त सुखदायी जननी, नव-युग नवजीवन देगी।
उस जीवन-दर्शन से होगा, मानव धर्म विकास । पश्चिम के असफल चिन्तन का, होगा शनैःशनैः अब ह्रास ।।1।।
ग्रीक मिटे यूनान मिट गए, भरत- -भूमि है अविनाशीं आदि अनादि अनंत राष्ट्र है, संस्कृति शुचिता अभिलाषी ।
भोग-वाद के महल ढह रहे, बदल रहा इतिहास । बुझा सके हिन्दुत्व सुधा ही, अब वसुधा की प्यास । । 2 11
सत्रह बार क्षमा अरिदल को, ऐसी भूल न अब होगी । कोटि-कोटि बाँहों वाली माँ, अब ना अबला कहलाएगी ।
देश-विघातक षड्यंत्रों का, निश्चित निकट-विनाश | एक अखंडित-भारत देगा, अनुपम अटल- विश्वास ।।3।।
संघ-वृक्ष शाखा-उपशाखा, दसों दिशा में फैल रही । हिन्दू – राष्ट्र की विजय-पताका, लहर-लहर ललकार रही। केवल सत्ता से मत करना, परिवर्तन की आस । जागृत जनता के केन्द्रों से, होगा अमर समाज ।।
गीत -6
हम करें राष्ट्र आराधन,
तन से, मन से, धन से, तन-मन-धन जीवन से, हम करें राष्ट्र आराधन । ‘
अंतर से, मुख से, कृति से, निश्छल हो निर्मल मति से, श्रद्धा से, मस्तक नति से, हम करें राष्ट्र अभिवादन ।। हम…. अपने हँसते शैशव से, अपने खिलते यौवन से,
प्रौढ़तापूर्ण जीवन से, हम करें राष्ट्र का अर्चन ।। हम…. अपने अतीत को पढ़कर, अपना इतिहास उलट कर, अपना भवितव्य समझकर, हम करें राष्ट्र का चिन्तन ।। हम…..
हैं याद हमें युग-युग की जलती अनेक घटनाएँ जो माँ के सेवा पथ पर आई बनकर विपदाएँ, हमने शृंगार किया था माता का अरिमुण्डों से,
हमने ही उसे दिया था सांस्कृतिक उच्च सिंहासन, माँ जिस पर बैठी सुख से करती थी जग का शासन, अब कालचक्र की गति से वह टूट गया सिंहासन,
अपना तन-मन-धन देकर, हम करें पुनः संस्थापन ।
हम करें राष्ट्र आराधन ।।
संघ के गीत क्यों गाए जाते हैं?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गीत केवल संगीत नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, सेवा, अनुशासन, समरसता, संगठन और भारतीय संस्कृति के जीवन मूल्यों को जागृत करने वाले प्रेरणास्रोत हैं।
संघ की शाखाओं, प्रशिक्षण वर्गों, शिविरों, उत्सवों तथा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गीतों का विशेष स्थान है। सामूहिक रूप से गीत गाने से स्वयंसेवकों में आत्मविश्वास, अनुशासन, एकता, संगठन भावना तथा राष्ट्र के प्रति समर्पण का विकास होता है। प्रत्येक गीत अपने भीतर कोई न कोई प्रेरणादायक संदेश, ऐतिहासिक स्मरण अथवा जीवन मूल्य समाहित किए हुए होता है।
राष्ट्रभक्ति
गीतों के माध्यम से मातृभूमि के प्रति प्रेम, राष्ट्रीय गौरव तथा देश के लिए समर्पित जीवन जीने की प्रेरणा प्राप्त होती है।
संगठन भावना
सामूहिक गायन स्वयंसेवकों में एकता, अनुशासन, सहयोग और संगठन की शक्ति को मजबूत बनाता है।
संस्कार निर्माण
गीतों के माध्यम से सेवा, त्याग, समरसता, विनम्रता, कर्तव्य और सदाचार जैसे जीवन मूल्यों का विकास होता है।
भारतीय संस्कृति
अनेक गीत भारत के इतिहास, संस्कृति, महापुरुषों और गौरवशाली परम्पराओं का स्मरण कराते हैं।
चरित्र निर्माण
गीत व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, साहस और राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा उत्पन्न करते हैं।
प्रेरणा का स्रोत
संघ के गीत प्रत्येक आयु वर्ग के लिए प्रेरणादायक हैं और सकारात्मक जीवन दृष्टि विकसित करने में सहायक होते हैं।
🚩 संघ गीतों की विशेषता
संघ के गीत भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति, सेवा, समर्पण, चरित्र निर्माण और संगठन भावना का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करते हैं। यही कारण है कि शाखा, प्रशिक्षण वर्ग, उत्सव, शिविर तथा विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में इनका सामूहिक गायन आज भी प्रेरणा, उत्साह और आत्मविश्वास का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
संघ के गीत कब गाए जाते हैं?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गीत विभिन्न शाखाओं, प्रशिक्षण वर्गों, शिविरों, उत्सवों तथा विशेष कार्यक्रमों में सामूहिक रूप से गाए जाते हैं। इनका उद्देश्य प्रेरणा, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति एवं संगठन भावना का विकास करना है।
दैनिक शाखा
दैनिक शाखाओं में विभिन्न अवसरों पर प्रेरणादायक गीत, गणगीत एवं बालगीत गाए जाते हैं, जिससे स्वयंसेवकों में उत्साह, अनुशासन एवं संगठन भावना विकसित होती है।
संघ शिक्षा वर्ग एवं प्रशिक्षण शिविर
संघ शिक्षा वर्गों, प्रशिक्षण शिविरों तथा विशेष अभ्यास वर्गों में गीतों के माध्यम से राष्ट्रीय चरित्र, सेवा, नेतृत्व क्षमता एवं समर्पण की भावना को सुदृढ़ किया जाता है।
उत्सव एवं विशेष कार्यक्रम
विजयादशमी, गुरु पूर्णिमा, वर्ष प्रतिपदा, हिन्दू साम्राज्य दिवस, मकर संक्रान्ति तथा अन्य विशेष अवसरों पर गीत सामूहिक वातावरण को प्रेरणादायक बनाते हैं।
बाल एवं किशोर शाखाएँ
बाल स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणादायक बालगीत गाए जाते हैं, जिनके माध्यम से संस्कार, अनुशासन, राष्ट्रप्रेम, सहयोग एवं नेतृत्व के गुण विकसित होते हैं।
सामाजिक एवं सेवा कार्यक्रम
सेवा कार्यों, सामाजिक समरसता कार्यक्रमों, पथ संचलन, शिविरों एवं अन्य आयोजनों में गीत स्वयंसेवकों को समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं।
⭐ संघ गीतों की विशेष भूमिका
संघ के गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे स्वयंसेवकों के व्यक्तित्व निर्माण, राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक जागरण, अनुशासन, सेवा, समर्पण और संगठन शक्ति को मजबूत बनाने वाले प्रेरणास्रोत हैं। सामूहिक गायन से आत्मविश्वास, सकारात्मक ऊर्जा तथा राष्ट्रहित के प्रति प्रतिबद्धता का विकास होता है।
गणगीत, एकलगीत एवं बालगीत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में विभिन्न अवसरों एवं आयु वर्ग के अनुसार अनेक प्रकार के गीत गाए जाते हैं। प्रत्येक गीत का उद्देश्य राष्ट्रभक्ति, संगठन, संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण है।
गणगीत
गणगीत ऐसे प्रेरणादायक गीत होते हैं जिन्हें समूह में सामूहिक स्वर में गाया जाता है। इनसे संगठन भावना, अनुशासन और एकता का विकास होता है।
- ✔ सामूहिक गायन
- ✔ शाखा एवं शिविर
- ✔ संगठन शक्ति
- ✔ राष्ट्रभक्ति
एकलगीत
एकलगीत किसी एक स्वयंसेवक द्वारा प्रस्तुत किए जाते हैं। इनमें प्रेरणा, भावपूर्ण प्रस्तुति और सांस्कृतिक संदेश प्रमुख होते हैं।
- ✔ व्यक्तिगत प्रस्तुति
- ✔ प्रेरक संदेश
- ✔ विशेष कार्यक्रम
- ✔ सांस्कृतिक आयोजन
बालगीत
बालगीत विशेष रूप से बाल एवं किशोर स्वयंसेवकों के लिए रचे गए हैं, जिनसे संस्कार, अनुशासन, राष्ट्रप्रेम और सहयोग की भावना विकसित होती है।
- ✔ सरल भाषा
- ✔ प्रेरणादायक
- ✔ संस्कार निर्माण
- ✔ बाल शाखाएँ
📊 तीनों गीतों की तुलना
| विशेषता | गणगीत | एकलगीत | बालगीत |
|---|---|---|---|
| गायन शैली | सामूहिक | एक व्यक्ति | सामूहिक / व्यक्तिगत |
| मुख्य उद्देश्य | संगठन एवं प्रेरणा | भावपूर्ण प्रस्तुति | संस्कार एवं शिक्षा |
| किसके लिए | सभी स्वयंसेवक | व्यक्तिगत प्रस्तुति | बाल एवं किशोर |
| मुख्य अवसर | शाखा, शिविर, उत्सव | विशेष कार्यक्रम | बाल शाखा एवं संस्कार वर्ग |
🚩 सभी गीतों का एक ही उद्देश्य
चाहे वह गणगीत हो, एकलगीत हो या बालगीत—इन सभी का मूल उद्देश्य राष्ट्रभक्ति, संगठन, सेवा, अनुशासन, चरित्र निर्माण, सांस्कृतिक जागरण तथा समाज के प्रति समर्पण की भावना विकसित करना है। यही कारण है कि संघ के प्रत्येक गीत का अपना विशिष्ट महत्व है।
संघ के गीत से जुड़े सामान्य प्रश्न
संघ के गीतों, गणगीत, एकलगीत और बालगीतों के बारे में लोगों द्वारा पूछे जाने वाले प्रमुख प्रश्नों के उत्तर नीचे दिए गए हैं।
संघ के गीत क्या होते हैं?
संघ के गीत वे प्रेरणादायक गीत हैं जो राष्ट्रभक्ति, संगठन, सेवा, अनुशासन, समरसता और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को व्यक्त करते हैं।
संघ में गीत क्यों गाए जाते हैं?
गीतों के माध्यम से स्वयंसेवकों में उत्साह, संगठन भावना, राष्ट्रीय चेतना और चरित्र निर्माण की प्रेरणा विकसित की जाती है।
गणगीत और एकलगीत में क्या अंतर है?
गणगीत सामूहिक रूप से गाए जाते हैं, जबकि एकलगीत किसी एक स्वयंसेवक द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। दोनों का उद्देश्य प्रेरणा और संस्कार देना है।
बालगीत किसके लिए होते हैं?
बालगीत विशेष रूप से बाल एवं किशोर स्वयंसेवकों के लिए रचे जाते हैं ताकि उनमें अनुशासन, राष्ट्रप्रेम, सेवा और अच्छे संस्कार विकसित हों।
क्या इस वेबसाइट पर सभी गीतों का अर्थ भी उपलब्ध है?
हाँ। प्रत्येक गीत के लिए अलग विस्तृत पृष्ठ उपलब्ध है, जहाँ उसका सम्पूर्ण पाठ, सरल हिन्दी अर्थ, भावार्थ और प्रमुख शिक्षाएँ दी गई हैं।
📖 निष्कर्ष
संघ के गीत केवल गायन की परंपरा नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, सेवा, अनुशासन, समरसता, संगठन और भारतीय संस्कृति के आदर्शों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का प्रभावी माध्यम हैं। प्रत्येक गीत अपने भीतर कोई न कोई प्रेरक संदेश समाहित करता है और स्वयंसेवकों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- ✅ राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करते हैं।
- ✅ संगठन एवं सामूहिकता का विकास करते हैं।
- ✅ सेवा, त्याग और अनुशासन की प्रेरणा देते हैं।
- ✅ भारतीय संस्कृति एवं परम्पराओं का परिचय कराते हैं।
- ✅ बाल, किशोर एवं युवाओं के चरित्र निर्माण में सहायक हैं।
🚩 संघ साहित्य का विस्तृत अध्ययन करें
यदि आपको यह गीत संग्रह उपयोगी लगा हो, तो हमारे पोर्टल पर उपलब्ध सभी गणगीत, एकलगीत, बालगीत, प्रार्थना, सुभाषित, बोधकथाएँ, शाखा कार्यक्रम तथा अन्य संघ साहित्य भी अवश्य पढ़ें।
