Skip to content

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अध्ययन

Menu
  • होम
  • About US परिचय
  • संघ के सरसंघचालक
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
  • शाखा
  • संघ के गीत
  • एकल गीत
  • गणगीत
  • प्रार्थना
  • सुभाषित
  • एकात्मतास्तोत्रम्
  • शारीरिक विभाग
  • बोद्धिक विभाग
  • अमृत वचन
  • बोधकथा
    • बोधकथा
      • बोधकथा
        • प्रश्नोत्तरी
  • RSS संघ प्रश्नोत्तरी
  • डॉ० केशवराम बलिराम हेडगेवार जीवन चरित्र (प्रश्नोत्तरी)
    • डॉ केशव बलिराम हेडगेवार : Hindi Tweets
    • मातृभाषा_दिवस : Hindi Tweets
    • श्री गुरुजी: Hindi Tweets
  • गतिविधि
  • सम्पर्क सूत्र
  • Contact Us
Menu

गाय पर निबन्ध

Posted on March 24, 2023April 27, 2023 by student
गाय के उपर निबन्ध

गाय क्या है?

भारतीय नस्ल की देशी गाय जिसकी पीठ पर कुकुद (यूँही) शिवलिंग-नुमा बनी होती है, जहाँ से सूर्य केतु नाड़ी गाय के शरीर में शुरू होकर उसके स्तनों तक जाती है, जिससे वह सूर्य की किरणों द्वारा स्वर्णाक्षर पैदा करती हैं एवं अपने दूध में वह हमें स्वर्ण तत्त्व प्रदान करती है, जो हमें हर प्रकार की पौष्टिकता प्रदान कर निरोग रखने में सहायक है। इस गाय के गले की लटकन (गल कम्बल) झालर नुमा होती है।

माता है गाय ?

गाय को माता कहा जाता है; क्योंकि माँ अपने बच्चों के लालन-पालन के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर देती है यही गाय के साथ भी है। गाय का पूरा शरीर यहाँ तक कि उसका मूत्र और गोबर तक लाभदायक है। गाय के दूध को सर्वोत्तम पौष्टिक माना गया है, ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार माँ का दूध बच्चे के लिए सर्वाधिक पौष्टिक होता है। माँ का दूध मानव को दो-तीन साल के लिए ही उपलब्ध होता है; जबकि गाय का दूध हमें जीवन भर पौष्टिकता प्रदान कर सभी प्रकार के रोगों से मुक्ति प्रदान करता है। गाय जब रंभाती है, तो माँ शब्द निकलता है। इसीलिए गाय को माता कहते हैं।

देवालय है गाय ?

भारतीय नस्ल की देसी में 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास माना जाता है एवं 68 कोटि तीर्थों का वास इसमें है। इसलिए इसे चलता-फिरता देवालय कहा जाता है। गौग्रास व गौ की भारी महिमा है, जिसका विवरण वेद-पुराणों में बतलाया गया है।

शास्त्रों में गाय ?

‘गौ रूपी तीर्थ में गंगा आदि सभी नदियों तथा तीथों का आवास है, उसकी परम पावन धूलि में सर्व-पुष्टि विद्यमान है, उसके गोबर में साक्षात् लक्ष्मी विराजमान है और उसे प्रणाम करने से धर्म सम्पन्न हो जाता है। अतः गोमाता सदा-सर्वदा प्रणाम करने योग्य है।’ गौएँ स्वर्ग की सीढ़ी है, गौएँ स्वर्ग में भी पूजी जाती है, गौएँ समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली देवियाँ हैं, उनसे बढ़कर और कोई श्रेष्ठ वस्तु नहीं है।

गौएँ संसार की माता हैं। उनकी पूजा करने से सम्पूर्ण पितरों और देवताओं की पूजा हो जाती है। जिनके गोबर से लीपने पर सभा-भवन, पौंसले, घर और देवमंदिर भी शुद्ध हो जाते हैं, उन गौओं से बढ़कर और कौन प्राणी हो सकता है? गायों के नाम और गुणों का कीर्तन तथा श्रवण करना, गायों को दान देना और उनका दर्शन करना बहुत प्रशंसनीय समझा जाता है और इनसे सम्पूर्ण पापों का नाश तथा परम कल्याण की प्राप्ति होती है। समस्त सम्पदाओं की प्राप्ति जहाँ गाएँ प्रसन्न रहती हैं, वहाँ समस्त सम्पदाएं स्वयमेव प्रकट होती हैं और जहाँ गाएँ दुःखी रहती हैं, वहाँ सम्पदाएं दुःखी होकर लुप्त हो जाती है।

बौद्धिक शक्ति की भरपूर मात्रा 50 गायों को एक साथ खड़ी कर किसी एक गाय के बछड़े

को छोड़ दिया जाए, तो वह दौड़कर अपनी माँ के पास ही पहुँचेगा; जबकि भैंस के पाड़े को तो उसके स्वामी उसकी माँ के पास पहुँचाने का कार्य करते हैं। इससे सिद्ध होता है कि गाय और उसके बछड़े में सोचने और समझने की क्षमता भैंस से कहीं अधिक होती है।

गौ-भक्त के लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं

गोभक्त मनुष्य जिस-जिस वस्तु की इच्छा करता है, वह सब उसे प्राप्त होती है। स्त्रियों में भी जो गौओं की भक्त हैं वे मनोवांछित कामनाएँ प्राप्त कर लेती हैं। पुत्रार्थी मनुष्य पुत्र पाता है और कन्यार्थी कन्या। धन चाहने वाले को धन और धर्म चाहने वाले को धर्म प्राप्त होता है। विद्यार्थी विद्या पाता है और सुखार्थी सुख । गौभक्त के लिए यहाँ कुछ भी दुर्लभ नहीं है।

गाय को चारा देने की महिमा

जो एक वर्ष तक प्रतिदिन स्वयं भोजन के पहले दूसरे की गाय को एक मुट्ठी घास खिलाता है, उसका वह व्रत सम्पूर्ण कामनाओं को पूर्ण करने वाला होता है। जो गौओं को प्रतिदिन जल और तृणसहित भोजन प्रदान करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है, इसमे किंचिन्मात्र भी संदेह नहीं है।

तीर्थस्थानों में जाने से; ब्राह्मणों को भोजन कराने जो पुण्य प्राप्त होता है; सभी व्रत-उपवासों एवं तपस्याओं में जो पुण्य है; महादान करने से जो पुण्य है; श्रीहरि के पूजन में जो पुण्य है, पृथ्वी की परिक्रमा करने में जो पुण्य है; वेदवाक्यों के पठन-पाठन में जो पुण्य और समस्त यज्ञों की दीक्षा ग्रहण करने में जो पुण्य है; वे सभी पुण्य मनुष्य को केवल गायों को तृण खिलाने मात्र से तत्काल मिल जाते हैं।

चलता फिरता औषधालय है गाय

भारतीय नस्ल की देसी गाय ही पूरे ब्रह्माण्ड में एक ऐसा प्राणी है. जिसके मल-मूत्र में औषधीय गुण है और जिसके बिना जीवन के सोलह संस्कार या कोई धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण नहीं होते हैं। गोबर- गौमूत्र से जैविक खाद द्वारा उत्पन्न अन्न, फल, सब्जी आदि के गुणों की व्याख्या नहीं की जा सकती है। गाय के गोबर में लक्ष्मी जी का एवं गौमूत्र में गंगाजी का निवास माना गया है। गोवा जबरदस्त एंटीसेप्टिक होता है, इसलिए गोबर से लिपे-पुते घरों में प्लेग, हैजा आदि भयंकर बीमारी नहीं होती, रेडियेशन का प्रभाव नहीं होता, गोबर में जहर खींचने की विशेष शक्ति होती है। गोबर से गैस पैदा की जाती है, इससे बिजली भी पैदा की जा सकती है। मनुष्य

गौमूत्र द्वारा कई प्रकार की आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण किया जाता है, संखिया, भिलावा आदि बड़े-बड़े जहरों की शुद्धि भी गोमूत्र से की जाती है। सोना-चाँदी की भस्म बनाते समय इन धातुओं को तपाकर, तेल में, गाय की छाछ में, गोमूत्र में बुझाकर शुद्ध किया जाता है। छोटी बछड़ी का गौमूत्र प्रतिदिन एक या दो तोला पीने से पेट के रोग दूर हो जाते हैं। यकृत पीड़ा में भी गौमूत्र का सेवन बड़ा लाभदायक होता है।

भारतीय गौवंश के मूत्र और गोबर से 32 प्रकार की औषधियों का निर्माण हो रहा है, जो कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान आदि सरकारों से मान्यता प्राप्त है। अमेरिका में गौमूत्र पर पेटेंट कराये गये। “फार्मास्यूटिकल कम्पोजीशन कटेनिंग काऊ यूरिन डिस्टीलेट एण्ड ऐंटीबायोटिक” शोध का उपयोग कैंसर रोग के इलाज पर किया जा रहा है।

गोबर और गौमूत्र से दरिद्रता का नाश

‘अग्नि पुराण’ का कथन है कि गौएँ पवित्र एवं मंगलमयी होती हैं। गौओं में सम्पूर्ण लोक प्रतिष्ठित है। गौओं का गोबर और मूत्र अलक्ष्मी (दरिद्रता) के नाश का सर्वोत्तम साधन है। गौओं को ग्राम देने वाला स्वर्ग को प्राप्त होता है।

मक्खी-मच्छर से मुक्ति

‘घर में यदि मक्खी-मच्छर हो गये हैं, तो गाय के कण्डे एवं घी से हवन करें, इस हवन के धुंए से कीटाणु, मक्खी-मच्छर एवं बैक्टिरिया मर जायेंगे।

गोबर से मूल्यवान इत्र

मूल्यवान इत्र गाय के गोबर से भी तैयार किया जाता है। गौमूत्र अर्क में मौजूद तत्त्व व रसायन के लाभ :-

  1. यह रक्त व विष की विकृति को हटाता है, बड़ी आंत में गति को शक्ति देता है, शरीर में वात, पित व कफ दोष को स्थिर रखने में सहयोग करता है।
  2. यह अनिच्छित व अनावश्यक वसा को निर्मित होने से रोकता है, लाल रक्त कोशिकाओं एवं हीमोग्लोबिन के उत्पादन में सन्तुलन रखता है।
  3. यह जीवाणु-नाशी व मूत्रवर्धक होने से विष (टोक्सिन) को नष्ट करता है, मूत्र मार्ग से पथरी को हटाने में सहायक है एवं रक्तशुद्धि करता है।
  4. यह तेजाब विहीन, वंशानुगत गठिया रोग से मुक्त करता है। आलस्य व मांसपेशियों की कमजोरी को हटाता है, कीटाणुनाशक, कीटाणु की वृद्धि रोकता है, मांस सड़ाव (गैंगरीन) से रक्षा करता है।
  5. यह रक्तशुद्धि कर्ता अस्थि में शक्ति प्रदाता (कीटाणुनाशक) एवं

रक्त में तेजाबी अवयवों को कम करता है।

  1. यह जीवन में शक्ति व उत्साहवर्द्धन में सक्रियता लाता है व मानसिक रूग्णता व प्यास से बचाता है। अस्थि में पुनः शक्ति प्रदान कर जीवन में उमंग वृद्धि करते हुए पुनरोत्पादक शक्ति प्रदान करता है।
  2. यह रोग प्रतिरोधत्मक शक्ति वर्द्धक, हृदय को शक्ति व संतोष प्रदान करता है।

गाय के दूध घी की पौष्टिकता

गाय का दूध जितना सात्विक होता है उतना सात्विक किसी बुद्धि अन्य का नहीं होता। हमारे देश की गाय सौम्य और सात्विक होती हैं, इसीलिए उनका दूध भी सात्विक होता है; जिसको पीने से तीक्ष्ण होती है और स्वभाव सौम्य व शांत होता है। विदेशी गायों का दूध तो ज्यादा होता है; परन्तु उनके दूध में उतनी सात्विकता नहीं होती तथा उनमें गुस्सा भी ज्यादा होता है। अतः उनका दूध पनि से मनुष्य का स्वभाव भी क्रूर होता है। विदेशी गायों के दूध में घी कम होता है और वह खाती भी ज्यादा है।

भैंस के दूध में घी ज्यादा होने से वह शरीर को मोटा है; परन्तु वह दूध सात्विक नहीं होता है। गाड़ी चलाने वाले जानते ही हैं कि गाड़ी का हॉर्न सुनते ही गाय सड़क के किनारे हो जाती। है; जबकि भैंस सड़क पर खड़ी ही रहती है। इसीलिए भैंस के दूध से बुद्धि स्थूल होती है। सैनिकों के घोड़ों को गाय का दूध पिलाया जाता है, जिससे वे घोड़ें बहुत तेज हो जाते हैं; परन्तु एक बार सैनिकों ने परीक्षा के लिए कुछ घोड़ों को भैंस का दूध पिलाया, जिससे वे घोड़े मोटे तो हो गए; परंतु जब नदी पार करने का काम पड़ा तब वे घोड़े पानी में बैठ गए। भैंस पानी में बैठा करती है। इसीलिए वही स्वभाव घोड़ों में भी आ गया। ऊँटनी का दूध तामसी होने से दुर्गति में ले जाने वाला होता है। स्मृतियों में ऊँट, कुत्ते, गधे आदि को अस्पृश्य बताया गया है। बकरी का दूध निरोग करने वाला एवं पचने में हल्का होता है; परन्तु वह गाय के दूध की तरह बुद्धिवर्द्धक और सात्विक बात समझने के लिए बल देने वाला नहीं होता। गाय दूध से निकला घी ‘अमृत’ कहलाता है। स्वर्ग की अप्सरा उर्वशी राजा पुरुरवा के पास गई, तो उसने अमृत की जगह गाय का दूध पीना ही स्वीकार किया। करता

‘घृतं मे वीर भक्ष्यं स्यात्’ (श्रीमद्भगवाद् – 9/14/22)

देशी गाय के घी के वैज्ञानिक लाभ

देसी गाय का 10 ग्राम घी का दीपक जलाने से वातावरण शुद्ध हो जाता है। देशी गाय के घी में Butyric एसिड होता है जो कैंसर और वायरल जैसे रोगों की रोकथाम करता है। देसी का घी त्रिदोष (कफ, वात व पित्त) नाशक है।

गाय के दूध में अधिक समझ शक्ति

हॉर्न बजाने एक बार में हट जाती है, जबकि भैंस तीन बार हॉर्न बजाने पर भी नहीं हटती। स्पष्ट है कि गाय एवं उसके दूध में समझ शक्ति अधिक होती है।

गाय दूध में फुर्ती

जन्म लेने पर गाय का बछड़ा गेंद की तरह उछलता है; जबकि भैंस का पाड़ा रेंगता है। स्पष्ट है किएवं उसके दूध में भैंस की अपेक्षा अधिक फुर्ती होती है।

आँखों की ज्योति, लंबाई और बल को बढ़ाने वाला है गौ-दूध

गौ माता एक ऐसा जीव है जिसकी आंत 180 फुट लंबी होती है फलस्वरूप के दूध में ‘केरोटीन’ नामक ऐसा उपयोगी एवं बलशाली पदार्थ मिलता है, जो भैंस के दूध से कहीं अधिक प्रभावशाली होता है। बच्चों की लंबाई और सभी के बल को बढ़ाने के लिए यह अत्यन्त उपयोगी माना गया है। आँखों की ज्योति को बढ़ाने के लिए यह अत्यंत उपयोगी माना गया है।

गाय के दूध से बौद्धिक विकास

गाय ‘दूध में ‘सेरीब्रोसाइड’ नामक एक ऐसा तत्त्व होता है जो बौद्धिक विकास में अत्यंत लाभदायक होता है, जिससे स्मरणशक्ति में तेजी से वृद्धि होती है।

असाध्य बीमारियों की समाप्ति

गाय दूध में ‘स्टोनटियन’ नामक ऐसा पदार्थ भी होता है. जो अनुविकिरण प्रतिरोधक होता है। यह असाध्य बीमारियों को शरीर पर आक्रमण करने से रोकने का कार्य भी करता है। यह रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है; जिससे रोग का प्रभाव क्षीण हो जाता है।

रामबाण है गाय का दूध, ओमेगा-3 से भरपूर

वैज्ञानिक अनुसंधान के बाद यह सिद्ध हो चुका है कि ‘ओमेगा-3’ (यह एक ऐसा पौष्टिकता वर्धक तत्त्व है, जो सभी रोगों की समाप्ति के लिए रामबाण है) केवल गौ माता के दूध में ही सबसे अधिक मात्रा में पाया जाता है। आहार में ओमेगा-3 से डी० एच० ए० तत्त्व बढ़ता है। इसी तत्त्व से ही मानव मस्तिष्क और आँखों की ज्योति बढ़ती है। ई० एफ० ए० में दो तत्त्व ओमेगा-3 और ओमेगा-6 बताये जाते हैं। मस्तिष्क का संतुलन इसी तत्त्व से बनता है। आज विदेशी वैज्ञानिक इसके कैप्सूल बनाकर दवा के रूप में इसे बेचकर अरबों-खरबों रूपये का व्यापार कर रहे हैं। विटामिन से भरपूर माँ के दूध के समकक्ष

प्रो० एन० एन० गोडकेले के अनुसार गाय के दूध में सभी महत्त्वपूर्ण विटामिन जैसे- अल्बुमिनाइड, वसा, क्षार, लवण तथा कार्बोहाइड्रेट है ही साथ ही समस्त विटामिन भी उपलब्ध हैं। अनेक शोध के पश्चात् यह भी पाया गया कि देशी गाय के दूध में 8 प्रतिशत प्रोटीन, 0.7 प्रतिशत खनिज व विटामिन ए, बी, सी, डी व ई प्रचुर माता में विद्यमान है, जो गर्भवती महिलाओं व बच्चों के लिए अत्यन्त उपयोग होता है। दूध में कैलोरी 65%, प्रोटीन 3.3%, वसा 4. 1% होती है। जो माँ के दूध के लगभग समकक्ष है।

कोलस्ट्राल से मुक्ति

वैज्ञानिकों का मत है कि के दूध से कोलेस्ट्राल नहीं बढ़ता। हृदय रोगियों के लिए यह बहुत उपयोगी माना गया है। फलस्वरूप मोटापा भी नहीं बढ़ता। का दूध व्यक्ति को इकहरा (स्लिम) एवं चुस्त भी रखता है।

टी० बी० और कैंसर की समाप्ति

क्षय (टी० बी०) रोगी को यदि के दूध में शतावरी मिलाकर दिया जाये तो टी० बी० रोग समाप्त हो जाता हैं। एच० डी० जी० आई० प्रोटीन होने से रक्त की शिराओं में कैंसर प्रवेश नहीं कर सकता। पंचगव्य आधारित 80 बिस्तर वाला कैंसर हॉस्पिटल गिरी विहार, संकुल नेशनल हाईवे नं. 8. नवसारी रोड़, वागलधारा, जिला बलसाड़, गुजरात में चल रहा है। यहाँ तीसरे स्टेज के कैंसर के रोगियों का भी सफलतापूर्वक निःशुल्क इलाज हो रहा है।

हार्ट अटैक की समाप्ति

‘इंटर नेशनल कार्डियोलॉजी के अध्यक्ष डॉ॰ शान्तिलाल शाह’ ने कहा – कि भैंस के दूध में लोंगचेन फेट होता है, जो नसों में जम जाता है। भरी पड़ी नसे हार्ट में जम जाने के फलस्वरूप हार्ट अटैक की सम्भावना अधिक हो जाती है, इसलिए हृदय रोगियों के लिए का दूध ही सर्वोत्तम है।

बी-12 विटामिन

बी-12 जो भोजन का अत्यावश्यक विटामिन तत्त्व है। यह भारतीय की बड़ी आँतों में अत्यधिक पाया जाता है, जो व्यक्ति को निरोग एवं दीर्घायु बनाता है। इससे बच्चों एवं बड़ों के शारीरिक विकास में बढ़ोत्तरी तो होती ही है, साथ ही खून की कमी जैसी भयानक बीमारियाँ (एनीमिया) भी समाप्त हो जाती है।

गाय के दूध में 10 गुण चरक संहिता में गाय के दूध में 10 गुणों का वर्णन है।

का दूध स्वादिष्ट, शीतल, कोमल, चिकना, गाढ़ा (लक्ष्ण. लसदार, भारी और बाहरी प्रभाव को विलंब से ग्रहण करने वाला तथा मन को प्रसन्न करने वाला होता है। केवल भारतीय देशी नस्ल की का दूध ही पौष्टिक

करनाल के ‘नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जैनेटिक रिसोर्सेस (एन० बी० ए० जी० आर०) संस्थान ने अध्ययन कर पाया कि भारतीय गायों में प्रचुर मात्र में ए-2 एलील जीन पाया जाता है, जो उन्हें स्वास्थ्यवर्द्धक दूध उत्पन्न करने में सहायता करता है। भारतीय नस्लों में इस जीन की फ्रीक्वेंसी 100% तक पाई जाती है, जबकि बाहरी नस्लों (जर्सी आदि) में यह 60% से भी कम होता है।

के दूध का वैज्ञानिक महत्त्व

दूध विज्ञान और देशी गाय

जीव विज्ञान के अनुसार भारतीय गायों के 209 तत्त्व के डी० एन० ए० में 67 पद पर स्थित एमिनो एसिड प्रोलीन पाया जाता है। इन गायों के ठंडे यूरोपीय देशों के पलायन से भारतीय के डी० एन० ए० में प्रोलीन एमीनो एसिड हिस्टीडीन के साथ उत्परिवर्तित हो गया। इस क्रिया को वैज्ञानिक भाषा में म्यूटेशन कहते हैं।

मूल गाय के दूध में प्रोलाइन अपने स्थान 67 पर बहुत दृढ़ता से आग्रहपूर्वक अपने पड़ोसी स्थान 66 पर स्थित अमीनो एसिड आईसोल्यूसीन से जुड़ा रहता है; परंतु जब प्रोलीन के स्थान पर हिस्ट्रीडीन आ जाता है, तब इस हिस्ट्रीडीन में अपने पड़ोसी स्थान 66 पर स्थित आइसोल्यूसीन से जुड़े रहने की प्रबल इच्छा नहीं पाई जाती।

Hestidine. मानव शरीर की पाचन क्रिया में आसानी से टूटकर बिखर जाता है। इस 7 एमीनो एसिड के प्रोटीन की बीसीएम 7 बीटा (Opioid narcotic) अफीम परिवार मादक का तत्त्व है, जो बहुत प्रभावशाली आक्सीडेंट ऑक्सीकरण एजेंट के रूप में मानव स्वास्थ्य पर अपनी श्रेणी के दूसरे अफीम जैसे ही मादक तत्त्वों जैसा दूरगामी दुष्प्रभाव छोड़ता है उस दूध को वैज्ञानिकों ने ए-1 दूध का नाम दिया है। यह दूध उन विदेशी गायों में पाया जाता है जिनके डी० एन० ए० में 67 वें स्थान पर प्रोलीन न होकर हिस्टिडीन होता है।

आरंभ में जब दूध को बी० सी० एम० 7 के कारण बड़े स्तर पर जानलेवा रोगों का कारण पाया गया तब न्यूजीलैंड के सारे डेयरी उद्योग के दूध का परीक्षण हुआ। सारे डेरी दूध पर किए जाने वाले प्रथम अनुसंधान में जो दूध मिला वह बी० सी० एम० 7 से दूषित पाया गया। इसीलिए यह सारा दूध ए-1 कहलाया। तदुपरांत ऐसे दूध की खोज आरंभ हुई बी० सी० एम० 7 रहित दूध को ए-2 नाम दिया गया। सुखद बात यह है कि देशी गाय का दूध ए-2 प्रकार का ही पाया जाता है। देसी गाय के दूध में यह स्वास्थ्य नाशक मादक विष तत्त्व बी० सी० एम० 7 नहीं होता। आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान से अमेरिका में यह भी पाया गया कि ठीक से पोषित देशी गाय के दूध और दूध से बने पदार्थ मानव शरीर में कोई भी रोग उत्पन्न नहीं होने देते। आज यदि भारत वर्ष का डेयरी उद्योग हमारी देशी गायों के दूध की उत्पादकता का महत्त्व समझ लें, तो भारत संपूर्ण विश्व के डेरी दूध व्यापार में सबसे बड़ा दूध निर्यातक देश बन सकता है।

आज संपूर्ण विश्व में यह चेतना आ गई है कि बाल्यावस्था में बच्चों को केवल ए-2 दूध ही देना चाहिए। विश्व बाजार में न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कोरिया, जापान और अब अमेरिका में प्रमाणित ए-2 दूध के दाम साधारण डेयरी दूध के दाम से कहीं अधिक है।। ए-2 दूध देने वाली गाय विश्व में सबसे अधिक भारतवर्ष में पाई

जाती है, यदि हमारी देशी गोपालन की नीतियों को समाज और शासन का प्रोत्साहन मिलता है, तो संपूर्ण विश्व के लिए ए-2 दूध आधारित पोषाहार का निर्यात भारत वर्ष से किया जा सकता है।

यह एक बड़े आर्थिक महत्त्व का विषय है। छोटे गरीब किसानों की कम दूध देने वाली देशी गाय के दूध का विश्व में जो आर्थिक महत्त्व हो सकता है, उसकी ओर हमने कई बार भारत सरकार का ध्यान दिलाने के प्रयास किए हैं; परंतु दुःख इस बात का है कि गाय की कोई भी बात हो उस में सांप्रदायिकता दिखाई देती है, चाहे कितना भी देश के लिए आर्थिक और सामाजिक स्वास्थ्य के महत्त्व का विषय हो ।

होलिस्टन फ्रिजियन प्रजाति की गाय, भैंस जैसी दिखने वाली. अधिक दूध देने के कारण सारे डेयरी दूध उद्योग की पसंदीदा है। होल्सिटन फ्रिजियन दूध के कारण लगभग सारे विश्व में डेरी का दूध ए-1 पाया गया। विश्व के सारे डेयरी उद्योग और राजनेताओं की यही कठिनाई है कि अपने सारे ए-1 दूध को एकदम कैसे अच्छे ए-2 दूध में परिवर्तित करें। आज विश्व का सारा डेयरी उद्योग भविष्य में केवल ए-2 दूध के उत्पादन के लिए अपनी गायों की प्रजाति में नस्ल सुधार के नए कार्यक्रम चला रहा है विश्व बाजार में भारतीय नस्ल की गीर गायों की इसीलिए बहुत माँग भी हो गई है। साहीवाल नस्ल के अच्छे वृषभ की भी बहुत बढ़ गई है।

सबसे पहले यह अनुसंधान न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने किया था; परंतु वहाँ के डेयरी उद्योग पर सरकारी तंत्र की मिलीभगत से यह वैज्ञानिक अनुसंधान छुपाने के प्रयत्नों से उद्विग्र होने पर 2007 में Devil in the milk illness, health and politics A-1 and A-2 milk नाम की पुस्तक Keith Woodford (कीथ वुड्फोर्ड) द्वारा न्यूजीलैंड में प्रकाशित हुई। इस पुस्तक में विस्तार से लगभग 30 वर्षों के विश्वभर के आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और रोगों के अनुसंधान

के आँकड़ों पर यह सिद्ध किया जा सका है कि बीसीएम 7 युक्त दूध ए-1 दूध मानव समाज के लिए विष तुल्य है।

ए-1 दूध का मानव स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव

जन्म के समय बालक के शरीर में Brain Barrier नहीं होता स्तनपान कराने के बाद 3-4 वर्ष की आयु तक शरीर में यह ब्लडब्रेन बैरियर स्थापित हो जाता है। इसीलिए जन्मोपरान्त माता के पोषण और स्तनपान द्वारा शिशु को मिलने वाले पोषण का बचपन में ही नहीं बड़े हो जाने पर ही भविष्य में मस्तिष्क के रोग और शरीर की रोग निरोधक क्षमता, स्वास्थ्य और व्यक्तित्व के निर्माण में अत्यधिक महत्त्व बताया जाता है। बाल्यकाल के रोग

आजकल भारतवर्ष में ही नहीं सारे विश्व में जन्मोपरान्त बच्चों में जो Autism बोध अक्षमता और डायबिटीज टाइप-1 (मधुमेह जैसे रोग) बढ़ रहे हैं, उनका स्पष्ट कारण ए-1 दूध का बी० सी० एम०

7 पाया जाना है।

गाय के घी के महत्त्वपूर्ण उपयोग

  1. गाय का घी नाक में डालने से पागलपन एवं एलजी दूर होता है।
  2. 20-25 ग्राम घी व मिश्री खिलाने से शराब, भांग व गांजे का नशा कम हो जाता
  3. गाय का घी नाक में डालने से लकवा रोग का भी उपचार होता है। 4. गाय का घी नाक में डालने से कान का पर्दा बिना ओपरेशन के ही ठीक हो जाता है।
  4. नाक में घी डालने से नाक की खुश्की दूर होती है और दिमाग तरो ताजा हो जाता है।
  1. गाय का घी नाक में डालने से कोमा में गये व्यक्ति की चेतना वापस लौट आती है
  2. गाय का घी नाक में डालने से बाल का झड़ना समाप्त होकर नए बाल आने लगते हैं।
  3. गाय के घी को नाक में डालने से मानसिक शांति मिलती है, स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है।
  4. हाथ पाव में जलन होने पर गाय के घी से तलवों में मालिश करने से जलन ठीक हो जाता है।
  1. हिचकी के न रुकने पर गाय का आधा चम्मच घी खाए, हिचकी स्वयं रुक जाएगी।
  2. गाय के घी का नियमित सेवन करने से एसिडिटी व कब्ज की शिकायत कम हो जाती है।
  3. गाय के घी से बल और वीर्य बढ़ता है और शारीरिक व मानसिक ताकत में भी इजाफा होता है।
  4. गाय के पुराने घी से बच्चों को छाती और पीठ पर मालिश करने से

कफ की शिकायत दूर हो जाती है।

  1. अगर अधिक कमजोरी लगे, तो एक गिलास दूध गाय का घी और मिश्री डालकर पी लें। में एक चम्मच
  2. गाय का घी न सिर्फ कैंसर को पैदा होने से रोकता है अपितु इस बीमारी के फैलने से भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है।
  3. जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाई खाने की मनाही है, तो गाय का घी खाने से हृदय मजबूत होता है।
  4. देसी गाय के घी में कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता होती है। इसके सेवन से स्तन तथा आंत के खतरनाक कैंसर से बचा जा सकता है।
  1. किसी भी प्रकार के कार्य करने के बाद कमजोरी आने पर एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच देसी गाय का घी मिलाकर पीने से थकान बिल्कुल कम हो जाती है।
  2. फफोलों पर गाय का देसी घी लगाने से आराम मिलता है। गाय के घी की छाती पर मालिस करने से बच्चों के बलगम को बाहर निकालने में सहायक होता है।
  3. साँप के काटने पर 100-150 ग्राम घी पिलायें, उपर से जितना गुनगुना पानी पिला सके पिलायें; इससे उलटी और दस्त तो लगेंगे ही, लेकिन साँप का विष कम हो जायेगा।
  4. दो बूंद देसी गाय का घी नाक में प्रतिदिन सुबह-शाम डालने से माइग्रेन दर्द ठीक होता है।
  5. सिर दर्द होने पर शरीर में गर्मी लगती हो, तो गाय के घी की पैरों के तलवों पर मालिश करें, सर दर्द ठीक हो जायेगा।
  6. यह स्मरण रहे कि गाय के घी के सेवन से कोलेस्ट्रॉल व वजन नहीं बढ़ता, बल्कि वजन को संतुलित करता है। अर्थात् कमजोर व्यक्ति का वजन बढ़ता है और मोटे व्यक्ति का मोटापा (वजन) कम होता है।
  7. एक चम्मच गाय का शुद्ध घी में एक चम्मच बूरा और एक चम्मच पिसी काली मिर्च इन तीनों को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय चाट कर ऊपर से गर्म मीठा दूध पीने से आँखों की ज्योति बढ़ती है।
  8. गाय के घी को ठंडे जल में फेंट लें और फिर घी को पानी से अलग कर लें, यह प्रक्रिया लगभग सौ बार करें और इसमें थोड़ा सा कपूर डालकर मिला दें। इस विधि द्वारा प्राप्त घी एक असर कारक औषधि में परिवर्तित हो जाता है, जिसे त्वचा सम्बन्धी हर चर्म रोगों में चमत्कारिक मलहम कि तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं। यह
  9. सौराइशिस के लिए भी कारगर है।
  10. गाय का घी एक अच्छा (LDL) कोलेस्ट्रॉल । उच्च कोलेस्ट्रॉल के रोगियों को गाय का घी ही खाना चाहिए। यह एक बहुत अच्छा टॉनिक भी है। अगर आप गाय के घी की कुछ बूँदें दिन में तीन बार, नाक में प्रयोग करेंगे, तो यह त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) को संतुलित करता है।
  11. घी, छिलका सहित पिसा हुआ काला चना और पिसी शक्कर (बूरा) तीनों को समान मात्रा में मिलाकर लड्डू बाँध लें। प्रातः खाली पेट एक लड्डू खूब चबा-चबाकर खाते हुए एक गिलास मीठा गुनगुना दूध घूँट-घूँट करके पीने से स्त्रियों के प्रदर रोग में आराम होता है, पुरुषों का शरीर मोटा ताजा यानी सुडौल और बलवान बनता है।

‘गौ विज्ञान परीक्षा संबंधित प्रश्न’ गौ आराधना

प्रश्न 01 : गौ के शरीर में कौन निवास करते हैं?

उत्तर समस्त देवगण ।

प्रश्न 02 गौ के पैरो में कौन निवास करते हैं?

उत्तर समस्त तीर्थ ।

प्रश्न 03 : बहुत सी गायों के शरीर में से कैसी गंध निकलती है ?

उत्तर : गुग्गुल के समान गंध निकलती है।

प्रश्न 04 : गायें किस प्रकार से कल्याण की सम्पादिका हैं ?

उत्तर : गाय परम कल्याण अर्थात् धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की सम्पादिका हैं।

प्रश्न 05 : गाय दर्शन स्पर्शादि से मनुष्य को कैसा बना देती है ?

उत्तर सर्वथा शुद्ध, निर्मल और निष्पाप बना देती हैं।

प्रश्न 06 : वेदों के अनुसार सपूर्ण जन ता स्वयं को क्या समझें?

उत्तर: सभी मनुष्य अपने आप को गौमाता का अंग ही समझें।

प्रश्न 08 : गौ मुझसे भिन्न नहीं, मैं उसके शरीर का ही एक अंग हैं, इसलिए मेरा क्या कर्तव्य है ?

उत्तर मैं जिस प्रकार अपनी रक्षा करता हूँ, उसी प्रकार गौमाता की रक्षा करनी चाहिए।

प्रश्न 09 गौ को माता कहने का क्या अर्थ है ?

उत्तर गौ को हम पवित्र और पूज्य दृष्टि से देखें।

प्रश्न 10 : गौ के प्रति कौन सा भाव हमें जागृत करना चाहिए ?

उत्तर गौ हमारी पूजनीय, वंदनीय एवं पालनीय ।

प्रश्न:11 सुरभी गाय की दोनों आँखों में किसका निवास है? :

दायीं आँख में सूर्य और बायीं आँख में चंद्रमा का निवास है ।

प्रश्न 12 : पद्मपुराण के अनुसार जो व्यक्ति गाय के खुर उड़ी धूल को अपने सिर पर लगाता है, उसे क्या फल मिलता है?

उत्तर : उस व्यक्ति को तीर्थ-स्नान का फल मिलता है।

प्रश्न 13: भविष्य पुराण के अनुसार गाय के किस अंश में गंगा-यमुना का निवास है?

उत्तर : गौमूत्र में सक्षात् गंगा तथा गौमय में यमुना का निवास है।

प्रश्न 14 : अग्नि पुराण के अनुसार यह पृथ्वी किससे पवित्र होती है ?

उत्तर : पृथ्वी गायों के श्वास से पवित्र होती है।

प्रश्न 15 : अश्वमेध यज्ञ के फल की प्राप्ति किसे होती है ?

उत्तर : जो व्यक्ति गौओं को प्रतिदिन जल, तृण (घास) और भोजन प्रदान करता है।

प्रश्न 16 : यज्ञशाला और भोजन बनाने का स्थान गाय के गोबर से क्यों लीपा जाता है ?

उत्तर : क्योंकि गाय के गोबर से लीपा हुआ स्थान सब प्रकार से पवित्र हो जाता है।

प्रश्न 17 : प्रातःकाल उठकर जो व्यक्ति गौघृतपात्र में रखे घी में अपना मुख देखता है, उसे क्या फल मिलता है ?

उत्तर : उसकी दरिद्रता एवं दुःख सदा के लिए समाप्त हो जाते हैं।

प्रश्न 18 कौन-सी विद्या के जप से गौलोक की प्राप्ति होती है ?

उत्तर: गोमती विद्या के जप से ।

प्रश्न 19 : स्कंद पुराण में गौ और वेद के लिए क्या कहा गया है ?

उत्तर: गौ सर्ववेदमयी है तथा वेद सर्वगौमय हैं।

प्रश्न 20: हम लोग गौमाता के साथ क्या देखना सीखें ?

उत्तर: गौ माता के शरीर के साथ अपनी एकरूपता देखना सीखें।

प्रश्न 21: शिशु राम की माताएँ बच्चे को नजर लगने के भय का निवारण करने के लिए क्या करती थीं?

उत्तर: राम को गाय के घी से तोलकर घी का तुलादान करती थीं।

प्रश्न 22: विश्वामित्र जी ने किस उद्देश्य से राम को राक्षसी ताड़का का वध करने के लिए कहा ?

उत्तर: गौ तथा ब्राह्मणों के हित के लिए

प्रश्न 23 : रामचरितमानस के अनुसार श्री राम का जन्म किस उद्देश्य से हुआ था ?

: श्रीराम विप्र, धेनु, सुर तथा संतों के हित के लिए, अवतरित हुए थे।

: रामराज्य में राजधर्म क्या है?

: गौएँ पूज्य थीं तथा उनकी सेवा करना राजधर्म था।

: बालक कृष्ण के भाल पर किसका तिलक सुशोभित होता था ?

: गौरोचन का तिलक ।

श्री कृष्ण का नाम गोपाल क्यों पड़ा ?

उत्तर : कृष्ण गौओं के पालक थे, उनसे अत्यधिक प्रेम करते थे। इसलिए गोपाल कहलाते थे

प्रश्न 27 : गौतत्त्व वेत्ताओं के आदि आचार्य कौन है ?

उत्तर : महर्षि वशिष्ठ ।

प्रश्न 28 : किसकी सेवा से रानी सुदक्षिणा के पुत्र रूप में महाराज रघु ने जन्म लिया ?

उत्तर : नंदिनी गाय के प्रभाव से ।

प्रश्न 29 : नंदिनी किसकी पुत्री थी ?

उत्तर : कामधेनु की।

प्रश्न 30 : अपने समस्त साहित्य में किसने गौसेवा को सबसे प्रमुख माना ?

उत्तर : भगवान वेद व्यास ने ।

: पुराणों में धर्म को क्या माना गया है?

: धर्म को वृषभ रूप माना गया है

: गौ सेवा से सत्यकाम जाबाल क्या बन गया ?

: गौसेवा से वह ब्रह्म ज्ञानी बन गया।

पाण्डवों में गाय की चर्या करने वाला कौन था ?

: सहदेव ।

: सहदेव के अनुसार युधिष्ठिर के पास कितनी गाएँ थीं?

उत्तर : युधिष्ठिर के पास गायों के आठ लाख वर्ग थे। प्रत्येक वर्ग में सौ-सौ गाय थीं।

: महाभारत काल में गौ का प्रश्न किससे जुड़ा हुआ था ?

: उस समय गौ राष्ट्र की सम्पत्ति मानी जाती थी तथा उसकी

मत्स्य देश के राजा विराट के गौहरण सम्बंधी प्रकरण किस बात का संकेतक है ?

उत्तर : यह गौ सम्पदा के महत्त्व तथा गौरक्षण की व्यवस्था की ओर संकेत करता है।

प्रश्न 37 : महाराष्ट्र के गौभक्त बालकों में किसका नाम अग्रणी है

उत्तर : बालक शिवाजी का।

प्रश्न 38 : एक दिन शिवाजी ने बाजार में क्या देखा ?

: एक कसाई भरे बाजार में ‘गाय को डण्डे मारता हुआ ले जा रहा था।’

39 : बालक शिवाजी ने क्या किया ?

उत्तर : शिवाजी ने तुरंत अपनी तलवार निकाली और एक वार से रस्सी काट दी, जिससे गाय बचकर भाग गई तथा दूसरे वार से कसाई का सिर काट दिया।

प्रश्न 40 : शिवाजी के राजा बनने के बाद उनके नाम के साथ क्या जोड़ा गया ?

: गौ-ब्राह्मण प्रतिपालक ।

प्रश्न 43 : संस्कार से लेकर दाह संस्कार तक सब में किस दान की आवश्यकता पड़ती है ?

उत्तर : गौदान की।

प्रश्न 44 : जिस राज्य में गौहत्या होती है, वह राज्य किससे दूर हटता
जाता है ?

उत्तर: आध्यात्मिकता से ।

प्रश्न 45 : जो राष्ट्र गौरक्षा में प्रमाद करता है, वह किससे हीन हो जाता है ?

उत्तर: वह यश और श्री से विहीन हो जाता है।

प्रश्न 46 : जगत में सर्वप्रथम किनकी सृष्टि हुई ?

उत्तर : सर्वप्रथम वेद, अग्नि, गौ तथा ब्राह्मणों की सृष्टि हुई।

प्रश्न 47 : पंचगव्य में गाय से प्राप्त कौन से पांच पदार्थ होते हैं?

उत्तर : गाय का दूध, दही, घी, गोमूत्र तथा गोबर ।

प्रश्न 48 : महात्मा गांधी के शब्दों में गाय क्या है?
उत्तर

प्रश्न 48 : महात्मा गांधी के शब्दों में गाय क्या है?
उत्तर: गाय दया-धर्म की मूर्तिवंत कविता है ।

प्रश्न 50 : हिंदुस्तानी सभ्यता का नाम ही गौसेवा है, यह किसने कहा
था ?

उत्तर: आचार्य विनोबा भावे ने।

प्रश्न 51 : पण्डित मदन मोहन मालवीय जी ने भारतीयों को क्या संदेश दिया ?

उत्तर : यदि हम गौओं की रक्षा करेंगे, तो गायें भी हमारी रक्षा करेंगी।

प्रश्न 52: ‘गौ यद्यपि पशु है, किन्तु हिंदू जाति और गौ का सम्बंध अनादि काल से माता-पुत्र का रहा है’ यह बात किस महापुरुष ने कही थी ?

उत्तर राजर्षि पुरुषोत्तम दास टण्डन ने।

प्रश्न 55 : निवृत्त शंकराचार्य स्वामी निरंजनदेव-तीर्थ विदेशी जर्सी गाय को नहीं रखने की बात क्यों करते हैं ?

उत्तर : उनका मानना है कि जर्सी गाय वास्तव में गाय ही नहीं है। वह संकर नस्ल का मांसाहारी पशु I

प्रश्न 56 : जगद्गुरु शंकराचर्य स्वामी स्वरूपानंद जी के कथनानुसार भूमि, पूजन के योग्य कब मानी जाती है ?

उत्तर : जब वह भूमि गोबर से लीपी गयी हो।

प्रश्न 57 आयुर्वेदिक दृष्टी से शरीर शोधन में उदर के विकारों को : दूर करने के लिए कौन सा प्रयोग निरापद है ?

उत्तर : पंचगव्य प्राशन का ।

प्रश्न 58 : लीवर, तिल्ली और पाचन यंत्रो में विकार होने पर किसका प्रयोग सफलता देता है ?

उत्तर : गोमूत्र का प्रयोग ।

प्रश्न 59: आणविक दुष्परिणामों को अवरुद्ध करने की शक्ति किसमें है ?

उत्तर : गाय के गोबर में। गौ देवी संपदा

प्रश्न 62 : गाय का दूध सात्विक है और बुद्धिबल को बढ़ाने वाला है, तो अन्य जानवरों का दूध कैसा है ?

उत्तर : अन्य सभी जानवरों का दूध रजोगुणी है और मन में विकार उत्पन्न करता है।

प्रश्न 63 : प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में चार माताएँ होती हैं, नाम बताएँ ?

उत्तर : पहली जन्मदात्री जननी, दूसरी गौमाता, तीसरी भूमाता और चौथी है जगन्माता परमेश्वरी ।

प्रश्न 64 : वैदिक ग्रंथों में भिन्न अवस्था की गायों के लिए भिन्न भिन्न नाम मिलते हैं, सफेद रं की गाय को किस नाम से पुकारते थे ?

उत्तर : कर्की नाम से।

प्रश्न 66 : अधिक दूध देने वाली गाय को क्या पुकारते थे

उत्तर : धेनु ।

प्रश्न 68 : बच्चा देकर बाँझ होने वाली गाय को क्या कहते थे ?

उत्तर : सूतवशा।

प्रश्न 69 : अपना बच्चा मर जाने पर दुसरे बछड़े से मानने की आवश्यकता होती थी, उस गाय को क्या कहते थे ?

निवान्या अथवा वान्या

प्रश्न 73 : ढाई साल के बछड़े को क्या कहते थे ?

उत्तर : पंचावि ।

प्रश्न 74 : तीन साल के वत्स को क्या कहते हैं ?

उत्तर : त्रिवत्सा।

प्रश्न 75 : साढ़े तीन साल की बछिया को क्या कहते हैं ?

उत्तर : तर्युवाट ।

प्रश्न 76 : साढ़े तीन साल की बछिया को क्या कहते हैं ?

उत्तर : तुही

प्रश्न 79 : पूजा में जो पंचामृत बनाया जाता है, उसमे पांच अमृत कौन
से है?

उत्तर : गाय का दूध, दही व घी के साथ शहद व मिश्री मिलकर पंचामृत बनाया जाता है।

प्रश्न 82 : एक लाख जप करने

उत्तर: कल्पवृक्ष का । से यह मंत्र किसका फल देता है ?

प्रश्न 83 : सुरभी देवी की पूजा कब करनी चाहिए ?

उत्तर : दीपावली के दूसरे दिन पूर्वाह्न काल में।

प्रश्न 84 : हमारे खाने-पीने में कौन से पदार्थ की प्रमुखता रहनी चाहिए ?

उत्तर : दूध, दही, घी, छाछ आदि गव्य पदार्थ की।

प्रश्न 85 : एक विशेष प्रकार से तैयार किया गया श्यामा गाय का घी किस रोग का इलाज करता है?

उत्तर: गठिया रोग का गौमूत्र की गंध से कौन मर जाते हैं?

प्रश्न 81 : सुरभि देवी का षडाक्षर मंत्र कौन सा है ?

: सुरभ्यै नमः ।

प्रश्न 82 : एक लाख जप करने

उत्तर: कल्पवृक्ष का ।

प्रश्न 83 : सुरभी देवी की पूजा कब करनी चाहिए ?

उत्तर : दीपावली के दूसरे दिन पूर्वाह्न काल में।

प्रश्न 84 : हमारे खाने-पीने में कौन से पदार्थ की प्रमुखता रहनी चाहिए

उत्तर : दूध, दही, घी, छाछ आदि गव्य पदार्थ की।


प्रश्न 85 : एक विशेष प्रकार से तैयार किया गया श्यामा गाय का घी किस रोग का इलाज करता है?

उत्तर: गठिया रोग का ।

प्रश्न 90 : गौ का अर्थ क्या है?

उत्तर: गतिशील “गच्छति इति गौ” ।

प्रश्न 91 : गौमूत्र का सबसे बड़ा लाभ क्या है ?

उत्तर : इसमें रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति होती है।

प्रश्न 92 : गौ-मूत्र नित्य प्रति की बीमारियों में किस प्रकार उपयोगी है ?

उत्तर : यह वात, पित्त, कफ आदि दोष को स्थिर रखने में सहयोग करता है।

सुरभि देवी का मंत्र कौन सा है।

: गौओं की अधिष्ठात्री देवी सुरभी गोलोक से प्रकट हुई थीं।

प्रश्न 94 : घर में यदि मक्खी-मच्छर हो तो क्या करना चाहिए?

उत्तर : गाय के कंडे तथा गाय के घी से हवन करना चाहिए। इससे मक्खी-मच्छर आदि दूर हो जाएंगे।

प्रश्न 95 : गौ को मारने से क्या-क्या नष्ट हो जाते हैं ?

उत्तर : अमृतत्व, स्फूर्ति, तेज आदि समाप्त हो जाते है।

प्रश्न 96 : गाय को त्यागमूर्ति क्यों कहा जाता है ?

उत्तर : क्योंकि उसका प्रत्येक तत्त्व मनुष्यों के काम आता है।

प्रश्न 97 : रासायनिक खाद की अपेक्षा गोबर की काम्पोस्ट खाद में किन-किन तत्त्वों की मात्रा अधिक होती हैं ?

उत्तर : नाईट्रोजन, फास्फोरस और पोटाशियम


प्रश्न 98 : 100 किलो गोबर में कितनी खाद तैयार होती हैं

त्तर : 3 टन।

प्रश्न 99 : यूरोप के बाजारों में गोबर की खाद से उपजाए हुए साग फल और सब्जियों की कीमत सामान्य वनस्पति से कितनी अधिक है?

उत्तर: दुगनी से तिगुनी तक।

प्रश्न 100: अमेरिका में जान राबिन्स ने अपनी पुस्तक ‘डाएट फार
न्यू अमेरिका’ में क्या तथ्य उजागर किए हैं?

उत्तर 13 वर्षों तक तथा सभी शाकाहारी हो जाए, तो यह भण्डार 260 वर्षों तक उपलब्ध रहेगा।

प्रश्न 101 गाय की बीमारी में सेवा करने का क्या फल होता है?

उत्तर : सेवा करने वाला स्वयं भी रोगमुक्त हो जाता है

प्रश्न 102 : ज्योतिष् के अनुसार विवाह के लिए सबसे उत्तम समय कब
माना गया है ?

: गोधूलि का समय सबसे उत्तम माना गया है

प्रश्न 103 यदि यात्रा के प्रारम्भ में गाय दिखाई दे जाए, तो उसका क्या फल होता है ?

उत्तर : यात्रा सफल हो जाती है तथा सब काम बन जाते हैं।

प्रश्न 104 : यदि गायों के झुण्ड में बछड़े को छोड़ दिया जाए, तो वह सबसे पहले कहाँ जाएगा ?

उत्तर वह 50 गायों के झुण्ड में से अपनी माता को खोज लेगा
तथा उसके पास ही जाएगा।

प्रश्न 105 : जो गायों को प्रतिदिन घास और जल देता है, उससे क्या फल मिलता है ? :

उत्तर ऐसा करने वाले को अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता हैं।

प्रश्न 106 : जो मन से भी गायों को कष्ट पहुँचानें की सोचता उसका क्या परिणाम होता है ?

उत्तर : उसे घोर नरक में जाना पड़ता है।

प्रश्न 107 : गाय के गोबर से घर को क्यों लीपना चाहिए ?

: गाय का गोबर कीटनाशक होता है। उससे सभी कीटाणु मर

: गाय का गोबर कीटनाशक होता है। उससे सभी कीटाणु मर

: गाय के गोबर से गोबर गैस व खाद बन सकती है,

प्रश्न 110 : गोमूत्र का प्रयोग किस भयानक बिमारी के इलाज में किया
जाता है ?

उत्तर : कैंसर रोग को ठीक करने के लिए गाय के गौमूत्र का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 111 : जन्म स्थान के आधार पर गाय की मुख्य नस्लें कौन सी है?

उत्तर: जन्म स्थान के आधार पर गाय की छः नस्लें है।

प्रश्न 112 : वह छह नस्लें कौन सी है ?

उत्तर: मैसूर के लंबे सिंह वाली गाय काठियावाड़ की गीर जाति की गाय, उत्तर की सफेद रंग की बड़ी रास की गाय, पंजाब की माउंट गुमरी या साहिवाल जाति की गाय, धनी जाति की गाय तथा छोटी रास की छोटे सिंह वाली पहाड़ी गाय ।

प्रश्न 113 : गिर नामक जंगल में पाई जाने वाली गाय जिनका ललाट

उत्तर विशेष उभरा हुआ और चौड़ा होता है इस नस्ल का मूल रंग सफेद होता है, उस पर विभिन्न रंगों के धब्बे होते हैं। इस नस्ल के पशु मैसूर के पशुओं की अपेक्षा बड़े होते हैं। इस नस्ल का नाम क्या है ?

। प्रश्न 114 : गीर गाय की प्रमुख नस्लें कौन कौन सी है ?

उत्तर: 1. गीर नस्ल 2. देवनी नस्ल 3. डांगी नस्ल 4. मेवात नस्ल तथा 5. निमाड़ी नस्ल ।

और अधिक जानकारी के लिया यहाँ क्लिक करे https://rsssangh.in/और हमारे इस पेज से जुड़ने के यहाँ क्लिक करे rsshang

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

संघ के कुछ

  • Health Tips
  • RSS News
  • RSS संघ प्रश्नोत्तरी
  • Tweets RSS
  • अम्रतवचन
  • आज का पंचांग
  • गीत ,गणगीत , बालगीत और एकलगीत
  • बोधकथा
  • भारत की महान विभूतियाँ
  • महाभारत
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक (आरएसएस)
  • शाखा
  • संघ उत्सव
  • संघ शिक्षा वर्ग
  • सर संघचालक
  • सुभाषित
  • स्मरणीय दिवस
  • स्वामी विवेकानन्द
© 2026 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अध्ययन | Powered by Minimalist Blog WordPress Theme