गीत
संघ मंत्र के हे उद्गाता। अमिट हमारा तुम से नाता ।।
कोटि-कोटि नर नित्य मर रहे, जब जग के नश्वर वैभव पर, तब तुमने हमको सिखलाया, मरकर अमर बने कैसे नर, जिसे जन्म दे बनी सपूती, शस्य श्यामला भारत माता ।।
अमिट हमारा…
क्षण-क्षण, तिल-तिल, हँस-हँस जलकर, तुमने पैदा की जो ज्वाला, ग्राम-ग्राम में प्रांत-प्रांत में, दमक उठी दीपों की माला, हम किरणें है उसी तेज की, जो उस चिर जीवन से आता ।।
अमिट हमारा….
श्वास-श्वास से स्वार्थ-त्याग की, तुमने पैदा की जो आँधी वह न हिमालय से रूक सकती, सागर से न जायेगी बाँधी हम झोके उस प्रबल पवन के, प्रलय स्वयं जिससे थर्राता ।।
अमिट हमारा……………
कार्य चिरंतन तव अपना हम, ध्वेय मार्ग पर बढ़ते जाते पूर्ण करेंगे दिव्य साधना, संघ मंत्र मन में दोहराते, अखिल जगत में फहरायेंगे, हिन्दू राष्ट्र की विमल पताका ।।
अमिट हमारा……
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