बाल गीत
जन-जन जगाऐं चलो मित्र भावना, राष्ट्र भावना ।।४।।
दैनन्दिन शाखा से शक्ति साधना, मातृवंदना । बाल और किशोर हम ज्ञान कुंज है, ज्ञान कुंज है। भारती के लाड़ले है शक्ति पूँज है, शक्ति पुंज है।। खेलों से सीखते हैं मित्र भावना, मित्र भावना। जन- जन जगाऐं चलो मित्र भावना, राष्ट्र भावना ।।।।।
मातृ-पितृ और गुरु देव के समान है, देव के समान हैं। तीनों की वंदना से बनते ज्ञानवान हैं, बनते ज्ञानवान है।। करो मित्र तीनों की चरण वंदना, चरण वंदना। जन- जन जगाऐं चलो मित्र भावना, राष्ट्र भावना ।।2।।
अंग हैं समाज के दिव्य रूप है, देश और समाज संग एकरूप हैं, भव्य रूप है। एकरूप है।। देव के आशीष से हो सिद्ध साधना, सिद्ध साधना। जन- जन जगाऐं चलो मित्र भावना, राष्ट्र भावना ।।3।।
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