एकलगीत
आओ मनाऐं रक्षाबंधन, आज मनाऐं रक्षाबंधन ।। ध्रु ।।
गिरिवासी भी वनवासी भी, हिंदु बन्धु सब भारतवासी। राष्ट्रप्रेम का भाव जगाकर, कसै सेह सूत्र का बन्धन।। आओ मनाऐं रक्षाबंधन, आज मनाएं रक्षाबंधन ।।। ।।
लै अतीत से आज प्रेरणा, सुनै सभी की हृदय वेदना । मन का कलुष हटाकर सबमिल, तप कर करें धरा को नन्दन ।। आओ मनाऐं रक्षाबंधन, आज मनाएं रक्षाबंधन ।।2।।
धामपुर से नहीं सूत्र यह मात्र सूत का, यह है साक्षी भवति-भूत का। हिन्दु-हिन्दु का भाव जगाकर, करें एक हम सबका तन-मन।। आओ मनाऐं रक्षाबंधन, आज मनाएँ रक्षाबंधन ।।३।।
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