शत नमन माधव चरण में, शत नमन माधव चरण में

गणगीत

शत नमन माधव चरण में, शत नमन माधव चरण में ।। ध्रु ।।

आपकी पीयूष वाणी, शब्द को भी धन्य करती।

पकी आत्मीयता थी, युगल नयनों से बरसती । और वह निश्छल हँसी जो, गूंज उठती थी गगन में।।

शत नमन माधव ।। 111

ज्ञान में तो आप ऋषिवर, दिखते थे आद्य शंकर । और भोला भाव शिशु सा, खेलता मुख पर निरन्तर ।। दीन दुखियों के लिये थी, द्रवित करूणा-धार मन में।।

शत नमन माधव…….. 11211

दुःख सुख निंदा-प्रशंसा, आपको सब एक ही थे। दिव्य गीता-ज्ञान से युत, आप तो स्थितप्रज्ञ ही थे। भरत भू के पुत्र उत्तम, आप थे युग पुरूष जन्मे ।

शत नमन माधव… 11311

मेरू गिरि सा मन अडिग था, आपने पाया महात्मन् । त्याग कैसा आपका वह, तेज साहस शील पावन। मात्र दर्शन भस्म कर दे, घोर षड्रिपु एक क्षण में।

शत नमन माधव……।।4।।

सिंधु सा गम्भीर मानस, थाह कब पाई किसी ने । आ गया सम्पर्क में जो, धन्यता पायी उसी ने।

आप योगेश्वर नये थे, छल भरे कुरूक्षेत्र रण में।।

शत नमन माधव…….. ।।5।।

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