गणगीत
नवयुग के इस नव विहान में नव उमंग संग साथ बढ़ें। हम नवयुग के गटनायक बन नवल ध्येय के साथ बढ़ें।। ध्रु ।।
मृदुल भावना लिये हृदय में हर हिन्दू के पास चलें। समता-ममता हृदय संजोये हिन्दू एकता भाव पलें । ।। केशव-माधव के चिंतन पथ नव तरंग के साथ बढ़ें । हम नवयुग के…..।।111
स्वतंत्रता के अमृत पर्व पर नयी सोच सब अपनायें। अर्थ पूर्ण भारत करने को भाव स्वदेशी विकसायें ।। जय स्वदेश का ध्येय मनों में लिये कोटि कर साथ बढ़े। हम नवयुग के…..।।211
चहुँ दिश मिल हरियाली रोपें वृक्षों को हम विकसायें। जल-वायु को करे सुरक्षित चहुँ दिश अमृत छलकायें ।। प्रकृति का संरक्षण करने जन-जन का सहकार बढ़ें। हम नवयुग का…. 113 11
शील शक्ति संग प्रेम भावना हर एक जन मन भाव भरें। स्वार्थ साधना त्याग देश और जिन समाज हित काम करें।। व्यक्ति-व्यक्ति का पूर्ण प्रबोधन राष्ट्रदेव सम्मान बढ़े ।। हम नवयुग का…।।411
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